कंकरीट के जंगल
Title: कंकरीट के जंगल View Translations like
Uploaded Date and Time: June 19, 2014, 8:45 a.m.
Creator: Pantnagar janvani
Likers:
Uploaded By: janvani
Description: बहुत बार विपति, संकट या आपदा अपने आने की आहट का पूर्वाभास करा देती है। केदारनाथ की आपदा (जून 2014) ने ऊखीमठ (2012)से ही घंटी बजानी शुरू कर दी थी। हम कहीं हद तक जानकर भी अंजान बने रहे और बहुत कुछ खो बैठे। मैं भी, अपने कई मित्रों को अब कभी नहीं मिल सकता। कई घर पुरूष विहीन हो गए, तो कई घरों की रोषनी धुप्प हो गई थी। खैर इसमें कुदरत की करनी............ अगर हमारे खेतों में कारखाने ही कारखाने लग जाएं, अगर बडे़-बडे़ मकानों के जंगल खडे़ हो जाएं, हमारा अन्नदाता किसान ही भूखों मरने लगे, हमारी कृषि-भूमि बंजर हो जाए, फिर क्या होगा! तब क्या होगा जब एक अरब 20 करोड़ लोगों को भोजन न मिल सके! अकाल जैसी आपदा मेरे देष में न आए कभी! मैदानी क्षेत्रों में भी सूखा और बाढ़ जैसी आषंकाएं प्रतिक्षण बनी रहती हैं। पंतनगर जनवाणी ने इसी को नजर में रखते हुए ’कंकरीट के जंगल’ नामक जागरूकता कार्यक्रम श्रृंखला का प्रसारण 16 जून से शुरू किया है। 16 जून के बाद यह कार्यक्रम प्रत्येक वृहस्पतिवार को प्रसारित किया जाएगा। उत्तराखंड के सभी सामुदायिक रेडियो आज 16 जून से अपने-अपने केन्द्रों पर पर्यावरण सजगता कार्यक्रम की श्रृंखला प्रारम्भ कर रहे हैं, ताकि केदार नाथ जैसी (16 जून, 2014) भीषण आपदा यहां फिर न आए।
Number of Downloads: 4

Comments. Total: 0

Login to comment